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Course Content
agronomy
agronomy is branch of agricultural science deals with intercultural practices and field management.
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IGKV-CET 2024 Live
About Lesson

परिभाषाएँ (Definition)

  1. पौधों के उचित वृद्धि एवं विकास के लिये भूमि में नमी की उचित मात्रा बनाये रखने के लिये भूमि में जल देने की क्रिया को सिंचाई कहते हैं। “The application of water to soil for the purpose of supplying the moisture, essential for plant growth is called as irrigation.” -By Israelson O.W.
  2. फसलों के सफल उत्पादन हेतु फसलों में कृत्रिम रूप से जल पहुँचने की क्रिया को सिंचाई कहते हैं। (Artificial application of water to the crops is known as irrigation).

Need and Objectives

  1. मिट्टी में पानी धारण शक्ति की कमी की पूर्ति करना (Lack of water retention capacity of soil) – जब मृदाओं में Water holding capacity कम होती है तो वर्षा होने पर maximum पानी मिट्टी की सतह से बह जाता है अथवा infiltration या percolation के द्वारा अन्दर चला जाता है या evaporation द्वारा नष्ट हो जाता है। इस प्रकार इन soil में पानी संचित न होने के कारण irrigation जल्दी-जल्दी करनी पड़ती है। ऐसी भूमि sandy होती है अर्थात् मिट्टी में sand particles अधिक होते हैं अर्थात् मिट्टी में बड़े कण (coarse particles) अधिक और छोटे कम (tiny particles) कम होते हैं।
  2. ऐसी फसलें उगाना जिन्हें पानी की अधिक जरूरत है (Growing of crops requiring more water) – High water requirement crop जैसे – धान, आलू, बरसीम उगाने पर irrigation की आवश्यकता होती है, क्योंकि केवल rain water पर depend नहीं रहा जा सकता है।
  3. वर्षा का असमान वितरण (Uneven distribution of rainfall) – यद्यपि देश में average annual rainfall 112 cm है, लेकिन देश के विभिन्न भागों में होने वाली rainfall uneven है । किन्हीं क्षेत्रों में 200 सेमी से अधिक वर्षा होती है तो किन्हीं क्षेत्रों में 40-50 सेमी से भी कम वर्षा होती है। ऐसी स्थिति में irrigation management करना आवश्यक है।
  4. वर्षा की अनियमितता (Irregularity of rainfall) – यदि Timely rainfall होती रहे तो crop अच्छी प्रकार उगाई जा सकती हैं । लेकिन इसके विपरीत rainfall का होना प्रायः अनिश्चित रहता है। उदाहरण के लिए, UP के मैदानी भागों में rainfall किसी वर्ष 15 June से start हो जाती है और किसी-किसी वर्ष 15 July तक को rainfall नहीं होती, जिससे Kharif की crops की sowing समय पर नहीं हो पाती । इसी प्रकार कभी तो वर्षा October के last तक होती रहती है और कभी-कभी September के 1st weak में ही समाप्त हो जाती है और Drought की स्थिति उत्पन्न हो जाती है । ऐसी condition में crop की timely sowing के लिए एवं crop की उचित वृद्धि के लिए irrigation की required होती है।
  5. कम वर्षा होना (Less precipitation) – पौधों के लिए sufficient water न मिलने पर उन development नहीं हो पाता । rainfall जब कम होती है तो plant की water req. को पूरा करने के लिए irrigation करनी पड़ती है। irrigation management न होने पर फसल completely waste हो जाती है ।
  6. शुष्क क्षेत्र (Dry area) – Dry area में rainfall कम होती है। ऐसे area में भी है वह sun की प्रखर heat से evaporate हो जाती है, जैसे – राजस्थान । ऐसे स्थानों में ground water भी बहुत कम होता है । इसलिये वहाँ पर नहरों आदि की व्यवस्था करनी पड़ती है।
  7. कीमती फसलें उगाना (Growing costly crops)
    • cash crop सब्जियाँ, oilseeds crop उगाने के लिए तथा अधिक production लेने के लिए समय पर irrigation करना आवश्यक होता है कर इसलिये इन crops के लिए Artificial irrigation की व्यवस्था आवश्यक है
  8. सघन कृषि अपनाना (Adaptation of intensive cultivation multiple cropping) – multiple cropping कार्यक्रम अपनाने से अधिक पानी की आवश्यकता होती है। Artificial irrigation की व्यवस्था के बिना intensive farming नहीं हो पाती है।
  9. फसल को कीटों से बचाने के लिए (Saving of crops from insect, plant protection) – फसल को कीटों से बचाने के लिए (दीमक, कटुआ आदि) फसल में सिंचाई करना आवश्यक हो जाता है। चूहों की भी इससे रोकथाम होती है।
  10. फसलों की पाले से रक्षा करने के लिए (Saving crops from frost) – ठण्डे मौसम में कुछ फसलों को frost से विशेष खतरा रहता है । अत: आलू, मटर, अरहर आदि फसलों की irrigation करने से पाले का भय नहीं रहता है।
  11.  खेत में जीवांश पदार्थ सड़ाने के लिए (For decomposition of Organic Matter) – कभी-कभी पानी की कमी के कारण भूमि में उपस्थित Organic Matter अच्छी प्रकार decompose नहीं पाता है, जिसके लिए irrigation करना आवश्यक हो जाता है और फसल पर termite का harmful effect नहीं पड़ता है तथा पौधों को आवश्यक पोषक तत्व भी आसानी से मिलते रहते हैं।

पौधों अथवा फसलों के लिये पानी (सिंचाई) की आवश्यकता अथवा महत्त्व (Importance of Water in Plant Life)

पौधों की growth and development के लिये जल की निम्न प्रकार आवश्यकता होती है-

  1. Plant का 80-90% तक भाग पानी (H2O) का बना होता है और chemically पानी plant का ही एक part होता है।
  2. Seed के अन्दर plant के सूक्ष्म रूप भ्रूण (Embryo) का अंकुरण बिना नमी (water) के possible नहीं है।
  3. Cytoplasm का मुख्य भाग (80-90%) water है। अतः cell division, बिना water के possible नहीं है अर्थात् plant की पूर्ण वृद्धि, water के ऊपर ही निर्भर है।
  4. (4) Plant में water, Carrier का कार्य भी करता है । roots, पोषक तत्वों को घोल के रूप में absorb करते हैं व water के माध्यम से चूसे गये तत्व ही, पौधों के अन्य, आवश्यकता के स्थान पर पहुंचते हैं।
  5. photosynthesis की क्रिया में water व carbon di oxide कच्चे पदार्थ के रूप में प्रयोग होते हैं एवं light की presence में, leaf के chlorophyll द्वारा carbohydrate में बदल जाते हैं।
  6. Leaf में बनने वाले carbohydrate का leaf से, दूसरे अंगों में transfer भी water के माध्यम से ही होता है।
  7. जल पौधों की cells की Turgidity अर्थात् फुलाकर रखता है जिसके परिणामस्वरूप cell size में बढ़ती हैं ।
  8. जल पौधों की Transpiration क्रिया के लिये भी आवश्यक इस क्रिया में पौधे अपने आपको environment के high temperature (लू) या low temperature पाला आदि से बचाते है।
  9. फसलों (पौधों) को जल की मात्रा बढ़ाकर, फसलों के ripening के समय में growth कर सकते हैं, जिससे demand of market के अनुसार फसलें harvest की जा सकती हैं।
  10. खेतों में पानी लगाने से, फसलों के harmful insect जैसे termite आदि नष्ट होते हैं।
  11. Land में crop की growth के लिये अनेकों beneficial bacteria जैसे Rhizobium, organic matter के decay में कार्य करने वाले bacteria जैसे nitrosomonas, nitrisococous; अनेकों beneficial fungus, algae, enzyme व अन्य micro organism भी soil moisture की उपयुक्त अवस्था पर ही पनपते हैं।
  12. लवणीय या ऊसर भूमि का सुधार अर्थात् पौधों के लिये toxic effect तत्वों का Leaching, irrigation के द्वारा ही सम्भव है या सिंचाई के पानी में घोलकर इन harmful salt को, खेत से बाहर निकालते हैं।
  13. लगातार भूमि की irrigation करने से soil particles के size में कमी होती है जो फसलों की बढ़वार के लिये उपयुक्त है।